सोशल मीडिया पर देसी जुगाड़ के कई अनोखे तरीके सामने आते रहते हैं। अब एक महिला का ऐसा ही जुगाड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। महिला ने जींस साफ करने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए।
तस्वीरों में महिला पीले रंग की साड़ी पहने जमीन पर गीली जींस लेकर बैठी नजर आती है। आमतौर पर कपड़ों पर जमी गंदगी साफ करने के लिए हाथ या ब्रश का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन महिला ने इसके लिए पावर ड्रिल मशीन का इस्तेमाल किया।
महिला ने ड्रिल मशीन के आगे एक गोल स्क्रब ब्रश लगा रखा था। इसके बाद जींस पर पानी और डिटर्जेंट डालकर ड्रिल मशीन की मदद से कपड़े को रगड़ना शुरू किया। मशीन की तेज रफ्तार से जींस पर जमा गंदगी जल्दी साफ होती नजर आती है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए मजे
महिला का यह देसी जुगाड़ सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। कई लोगों ने इसे भारतीय जुगाड़ की शानदार मिसाल बताया। वहीं कुछ यूजर्स ने मजेदार कमेंट करते हुए कहा कि घर में रखी टूलकिट का आखिरकार सही इस्तेमाल हो गया।
हालांकि, कुछ लोगों ने इस तरीके को लेकर सावधानी बरतने की सलाह भी दी। उनका कहना है कि ड्रिल मशीन पर ज्यादा दबाव पड़ने से कपड़ा खराब हो सकता है। बिजली से चलने वाली मशीन का इस्तेमाल पानी के आसपास करना भी जोखिम भरा हो सकता है।
कुल मिलाकर, महिला का यह अनोखा तरीका लोगों का ध्यान खींच रहा है और सोशल मीडिया पर देसी जुगाड़ को लेकर खूब चर्चा हो रही है।
क्या आप सोच सकते हैं कि कोई इंसान अपनी लग्जरी लाइफ या चमचमाती स्पोर्ट्स कारों को छोड़कर सिर्फ अपनी बिल्लियों पर हर महीने लाखों रुपए खर्च कर सकता है? सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन शिकागो की रहने वाली 28 साल की मॉडल कैमी चैन (Cami Chan) ऐसा सच में कर रही हैं. जहां लोग करोड़ों कमाकर महंगे ब्रांडेड कपड़े और गाड़ियां खरीदते हैं, वहीं कैमी अपनी चार प्यारी बिल्लियों को किसी राजकुमारियों जैसी जिंदगी दे रही हैं. आइए जानते हैं इस अनोखी बिल्ली प्रेमी की कहानी के बारे में.
लग्जरी कार नहीं, बिल्लियां हैं असली पसंद
नीड टू नो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कैमी चैन हर महीने लगभग 50,000 पाउंड (लगभग 65 लाख रुपए) की तगड़ी कमाई करती हैं. अगर वह चाहतीं तो अपनी कमाई से दुनिया भर के डिजाइनर कपड़े, महंगे वेकेशन और सुपरकार खरीद सकती थीं. लेकिन उनका कहना है कि उन्हें इन सब चीजों से ज्यादा खुशी अपनी चार बिल्लियों Artemis, Kerrigan, Jupiter और Mercury की देखभाल करने में मिलती है. ऑनलाइन सफलता मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले एक शुद्ध नस्ल की रैगडॉल बिल्ली ही खरीदी थी.
हर महीने ₹2 लाख से ज्यादा का खर्च
कैमी अपनी इन चारों बिल्लियों पर हर महीने 2,000 पाउंड (करीब 2.5 लाख रुपए) से ज्यादा खर्च करती हैं. इस बजट में बिल्लियों का प्रीमियम खाना, लिटर, ग्रूमिंग, रेगुलर मेडिकल चेक-अप और उनके ढेर सारे खिलौने शामिल हैं. वह उनके खाने-पीने के मामले में कभी कंजूसी नहीं करतीं और हमेशा बेस्ट क्वालिटी की चीजें चुनती हैं. उनके पास बिल्लियों के लिए सुंदर कपड़े और डिजाइनर बेड भी मौजूद हैं.
हेल्थ और ट्रैवल में नो कॉम्प्रोमाइज
कैमी कहती हैं कि बिल्लियों की सेहत के मामले में पैसे की कोई सीमा नहीं है. अगर उनमें से किसी की भी तबीयत खराब होती है, तो वह तुरंत अच्छे डॉक्टर के पास ले जाती हैं. इतना ही नहीं, जब कभी कैमी को शहर से बाहर जाना पड़ता है, तो वह अकेले जाने के बजाय एक्स्ट्रा पैसे खर्च करके अपनी बिल्लियों को भी साथ ले जाती हैं, ताकि उन्हें अकेलापन न महसूस हो.
‘लोग पागल कहें या कुछ भी, मुझे फर्क नहीं पड़ता’
कैमी जानती हैं कि बहुत से लोगों को बिल्लियों पर हर महीने इतना पैसा खर्च करना पागलपन लग सकता है. लेकिन उनका साफ कहना है कि ये बिल्लियां उनके परिवार का हिस्सा हैं. वह कड़ी मेहनत करती हैं और अपने शौक के लिए इन्हें पालकर बेहद खुश हैं. जहां कुछ लोगों का सपना लैम्बोर्गिनी खरीदने का होता है, वहीं कैमी का कहना है कि वह हर बार अपनी बिल्लियों को ही चुनेंगी.
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच इंसान और जानवर के बीच भरोसे की एक तस्वीर लोगों का ध्यान खींच रही है। तेज बहाव वाले पानी में एक युवक फंस गया था। ऐसे मुश्किल समय में एक भैंस उसके लिए सहारा बन गई।
बताया जा रहा है कि युवक ने भैंस की पीठ पर बैठकर बाढ़ के पानी को पार किया। पानी का बहाव काफी तेज था और चारों तरफ मटमैला पानी दिखाई दे रहा था। इसके बावजूद भैंस धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही और युवक को सुरक्षित दिशा में ले गई।
तेज बहाव के बीच भैंस पर बैठा युवक
तस्वीरों में युवक भैंस की पीठ पर बैठा नजर आ रहा है। आसपास पानी का बहाव इतना तेज था कि पैदल चलना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा था। युवक ने भैंस को मजबूती से पकड़ा हुआ था, जबकि भैंस लगातार आगे बढ़ती रही।
इस मुश्किल परिस्थिति में भैंस ने जिस तरह पानी के बीच रास्ता बनाया, उसने लोगों का ध्यान खींच लिया।
सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ
इस घटना की तस्वीर सामने आने के बाद लोग भैंस की तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे बाढ़ जैसी आपदा के बीच इंसान और जानवर के बीच भरोसे की मिसाल बताया।
लोगों का कहना है कि मुश्किल वक्त में यही भैंस युवक के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि जानवर भी अपने व्यवहार से इंसानों के लिए कितने मददगार साबित हो सकते हैं।
बाढ़ जैसी स्थिति में हालांकि तेज बहाव वाले पानी को पार करना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे हालात में बिना प्रशिक्षित बचाव दल की मदद के पानी में उतरने से बचना चाहिए।
कैनवास पर ब्रश चलता है और देखते ही देखते सफेद रंग की खाली सतह पर तस्वीर जीवंत हो उठती है. कहीं चेहरे की आंखों में भाव नजर आते हैं तो कहीं रंगों की बारीकी पूरी तस्वीर को खास बना देती है. यह हुनर है मुजफ्फरपुर की 21 साल की पलक वर्मा का, जिन्होंने बचपन के शौक को अब अपनी पहचान बना लिया है.
पलक को पेंटिंग का शौक LKG से ही था. शुरुआत स्केचिंग से हुई और धीरे-धीरे एक्रिलिक पेंटिंग समेत अलग-अलग आर्ट फॉर्म सीखती चली गईं. आज वह मुगल आर्ट और मॉडर्न आर्ट के साथ मिनिएचर, पोस्टर, नेचर और एब्सट्रैक्ट आर्ट में भी प्रयोग कर रही हैं.
तस्वीर बनाने से पहले बारीकी से समझती हैं हर डिटेल पलक के लिए पेंटिंग सिर्फ कैनवास पर रंग भरना नहीं है. किसी तस्वीर को पेंटिंग में बदलने से पहले वह उसकी हर छोटी-बड़ी डिटेल को ध्यान से देखती हैं. खासकर पोर्ट्रेट बनाते समय चेहरे के भाव और आंखों की बारीकियों पर उनका सबसे ज्यादा ध्यान रहता है.
एक स्केच या पेंटिंग को पूरा करने में उन्हें दो से तीन दिन तक लग जाते हैं. पलक कहती हैं कि फिनिशिंग और डिटेलिंग में काफी समय लगता है. उनका लक्ष्य अलग-अलग तरह की आर्ट सीखकर अपनी कला को और बेहतर बनाना है.
पिता ज्वेलरी आर्टिस्ट, बेटी ने उनसे सीखी बारीकी पलक की कला के पीछे उनके पिता की सीख भी बड़ी वजह है. उनके पिता खुद ज्वेलरी आर्टिस्ट हैं. यानी बारीक डिजाइन और कारीगरी उनके परिवार का हिस्सा रही है. बचपन से ही पिता ने पलक की पेंटिंग में रुचि को पहचाना और उसे निखारने में मदद की.
पिता सिर्फ बेटी की तारीफ नहीं करते थे, बल्कि पेंटिंग में कमी दिखने पर उसे सुधारने की सलाह भी देते थे. शुरुआत में पलक को लगता था कि शायद पापा को उनकी पेंटिंग पसंद नहीं आती, लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि गलतियां बताने वाला ही असल में बेहतर बनाने में मदद करता है.
राजा रवि वर्मा से प्रेरणा, पोर्ट्रेट पेंटिंग में खास दिलचस्पी पलक मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा की कला से भी काफी प्रभावित हैं. खासकर उनके पोर्ट्रेट पेंटिंग के काम ने पलक को आकर्षित किया. यही वजह है कि वह चेहरों के भाव और आंखों की बारीकियों को कैनवास पर उतारना पसंद करती हैं.
सोशल मीडिया से मिला प्लेटफॉर्म, अब मिलने लगे ऑर्डर पलक की कला अब घर और स्टूडियो तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया ने उनके हुनर को लोगों तक पहुंचाने का काम किया. उनकी बनाई पेंटिंग्स को पसंद करने वाले लोग अब उनसे तस्वीरों को पेंटिंग में बदलने के ऑर्डर भी दे रहे हैं. इन ऑर्डर से होने वाली कमाई से पलक अपनी कला से जुड़े खर्च निकाल रही हैं.
वह रोज करीब चार से पांच घंटे पेंटिंग की प्रैक्टिस करती हैं. अर्जेंट ऑर्डर मिलने पर कभी-कभी दिन-रात काम करना पड़ता है. अब पलक का अगला सपना अपनी पेंटिंग्स की बड़ी एग्जीबिशन लगाना है. मुजफ्फरपुर की यह युवा कलाकार मानती हैं कि पहचान सिर्फ हुनर से नहीं, बल्कि लगातार अभ्यास से बनती है. उनके ब्रश का हर स्ट्रोक इसी मेहनत और बड़े सपने की कहानी कहता है.
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के लहुरियादह गांव की कहानी लंबे समय तक पानी की कमी के संघर्ष से जुड़ी रही। करीब 100 घरों और 1500 की आबादी वाले इस गांव में लोगों को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर तक जाना पड़ता था। हालात इतने मुश्किल थे कि पानी की समस्या के कारण गांव के कई लड़कों की शादी तक रुक गई थी।
अब गांव की तस्वीर बदल चुकी है। जल जीवन मिशन के तहत संचालित हर घर नल योजना के जरिए घर-घर तक पानी पहुंचने लगा है। जिन लोगों को कभी एक-एक बूंद पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था, वे अब अपने घर की टोटी खोलकर पानी प्राप्त कर रहे हैं।
तीन दिन बाद आता था पानी का नंबर
मिर्जापुर की लालगंज तहसील के ड्रमंडगंज क्षेत्र में पहाड़ी पर स्थित लहुरियादह में कभी पानी का कोई स्थायी इंतजाम नहीं था। ग्रामीण पहाड़ पर मौजूद एक जलस्रोत से पानी इकट्ठा करके अपनी जरूरत पूरी करते थे।
जलस्रोत पर पानी भरने के लिए लोगों की बारी तय होती थी। कई बार एक परिवार का नंबर करीब तीन दिन बाद आता था। गर्मियों में हालात और भी खराब हो जाते थे। पानी की कमी इतनी बढ़ जाती थी कि प्रशासन को टैंकर भेजकर लोगों तक पानी पहुंचाना पड़ता था।
पांच किलोमीटर दूर से लाना पड़ता था पानी
पानी की जरूरत पूरी करने के लिए ग्रामीणों को कई बार करीब पांच किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता था। आसपास के इलाकों और पहाड़ के नीचे से पानी लाकर परिवार अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते थे।
गर्मी के दिनों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती थी कि एक व्यक्ति को कई दिनों के इस्तेमाल के लिए बेहद सीमित मात्रा में पानी मिल पाता था। पानी की इसी समस्या ने गांव के लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी थी।
पानी की कमी से शादियों पर भी पड़ा असर
लहुरियादह में पानी की समस्या सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी तक सीमित नहीं रही। गांव में पानी की कमी इतनी बड़ी समस्या बन गई थी कि कई परिवारों के लिए शादी-ब्याह भी मुश्किल हो गया था।
लोगों का कहना था कि जब किसी परिवार में बहू आती तो उसके लिए भी पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन जाता था। इसी वजह से गांव में लड़कों की शादी तक रुकने की बात सामने आई।
हर घर में लगी टोटी, बदल गई जिंदगी
जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल योजना ने ग्रामीणों की इस परेशानी को काफी हद तक बदल दिया। 31 अगस्त 2023 को पहली बार गांव में पाइपलाइन के जरिए नल से पानी पहुंचा।
अब गांव के ज्यादातर घरों में नल लगे हैं और सुबह-शाम पानी की सप्लाई होती है। ग्रामीणों को पानी के लिए पहाड़ों और जंगलों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
गांव की रहने वाली सुघरी देवी बताती हैं कि पहले पानी के स्रोत के पास ही रात-दिन लोगों की लाइन लगी रहती थी। अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ता था। अब घर में नल लगा है और टोटी खोलते ही पानी मिल जाता है।
वहीं छमा देवी के मुताबिक, शादी के बाद जब वह गांव आई थीं, तब पानी की समस्या सबसे बड़ी परेशानी थी। खाना बनाने और घर के दूसरे कामों के लिए भी दूर पहाड़ी जलस्रोत तक जाना पड़ता था। अब घर में ही पानी मिलने से उनकी जिंदगी काफी आसान हो गई है।
लहुरियादह के ग्रामीणों के लिए घर तक पानी पहुंचना सिर्फ एक सरकारी योजना का लाभ नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परेशानी से बड़ी राहत है। जिस पानी के लिए कभी पूरा गांव संघर्ष करता था, वही पानी अब घर की टोटी से मिलने लगा है।
सोशल मीडिया (Social Media) पर आए दिन ऐसे वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिन्हें देखकर कुछ पल के लिए हम भी सोच में पड़ जाते हैं। इन दिनों ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक शख्स के साथ कुछ ऐसा होता है, जिसे देखकर किसी की भी धड़कन बढ़ सकती है। यह वीडियो खास तौर पर उन लोगों के लिए एक चेतावनी जैसा है, जो चलते समय मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। वायरल वीडियो (Viral Video) को @gharkekalesh नाम के एक्स हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो के साथ लिखा गया है कि एक आदमी ऊपर की मंजिल से गिर गया। साथ ही लोगों को सावधानी से चलने और नीचे देखने की सलाह दी गई है।
फोन ने भटकाया ध्यान, खुली जगह में जा गिरा शख्स
वीडियो (Video) में देखा जा सकता है कि एक शख्स सीढ़ियों से ऊपर की ओर जा रहा है। उसके हाथ में मोबाइल फोन नजर आ रहा है। सीढ़ियां चढ़ते हुए एक पल के लिए उसका ध्यान मोबाइल की तरफ चला जाता है। इसके बाद जैसे ही वह आगे बढ़ता है, उसके कदम छत पर बनी एक खुली जगह की तरफ चले जाते हैं। अगले ही पल वह उस खुले हिस्से में जा गिरता है। घटना इतनी अचानक होती है कि वीडियो देखने वाला भी कुछ सेकंड के लिए हैरान रह जाता है। ऐसा लगता है कि मोबाइल पर ध्यान जाने की वजह से शख्स को सामने मौजूद खतरनाक जगह दिखाई नहीं दी। हालांकि, इस वीडियो में यह जानकारी नहीं दी गई है कि हादसे के बाद उस शख्स की हालत कैसी थी या उसके साथ आगे क्या हुआ इसलिए उसके बारे में किसी तरह का दावा करना सही नहीं होगा। वीडियो को शेयर करने का मकसद लोगों को सावधान करना ही नजर आता है।
चलते हुए फोन चलाने की ऐसी कीमत? शख्स के साथ हुआ खतरनाक हादसा
इस वीडियो (Video) के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि छत पर मौजूद इस तरह की खुली जगह को जाली या किसी मजबूत कवर से ढकना चाहिए था। वहीं, कुछ यूजर्स ने चलते समय मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत को हादसे की बड़ी वजह बताया। कुछ लोगों ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसी जगहों पर खुले हिस्सों को सुरक्षित तरीके से ढकना बेहद जरूरी है, ताकि किसी की नजर चूकने पर भी बड़ा हादसा न हो। फिर भी एहतियात के तौर पर लोगों को सीढ़ियों, छतों, सड़क या निर्माणाधीन जगहों पर चलते समय मोबाइल से दूरी बनाकर रहना चाहिए। कई बार सिर्फ एक सेकंड का ध्यान भटकना भी भारी पड़ सकता है।
A guy fell from the floor above. Please watch where you’re walking and look down too💀😭 pic.twitter.com/k9XZg3s5eC
अयोध्या, । भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या वैसे तो हर दिन भक्ति, आस्था और अध्यात्म का केंद्र बनी रहती है, लेकिन दीपावली के तीसरे दिन यहां एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इस दिन भक्त यमराज यानी मृत्यु के देवता की पूजा करते हैं। यह अनोखा आयोजन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि पौराणिक कथा और पारिवारिक प्रेम का भी प्रतीक है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम ने पृथ्वी से वैकुंठ गमन का निश्चय किया, तब यमराज स्वयं उन्हें लेने अयोध्या आए थे।
कहा जाता है कि उन्होंने जमथरा घाट पर विश्राम किया था और वहीं से आगे बढ़कर भगवान श्रीराम ने गुप्तार घाट पर जल समाधि ली थी। इसी स्मृति में हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि, जिसे यम द्वितीया कहा जाता है, अयोध्या के सरयू तट स्थित यमथरा घाट पर भव्य पूजा और मेला आयोजित किया जाता है। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान कर भयमुक्त और दीर्घायु जीवन की कामना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन यमराज की पूजा करने से व्यक्ति को यमभय से मुक्ति और मृत्यु पर विजय का आशीर्वाद मिलता है।
खासतौर पर बहनें इस दिन व्रत रखती हैं और अपने भाइयों की दीर्घायु और कल्याण के लिए यमराज से प्रार्थना करती हैं। यह दिन भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक भी माना जाता है।
कहा जाता है कि यमराज ने यह तपोस्थली स्वयं अयोध्या माता से प्राप्त की थी, इसलिए यहां की पूजा का महत्व अन्य स्थानों से कहीं अधिक है। यमथरा घाट पर इस दिन भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। आरती, भजन, दीपदान और मेला पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना देते हैं। दीपावली के तीसरे दिन अयोध्या का यह आयोजन सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और पौराणिक इतिहास का संगम है। श्रद्धालु यह मानते हैं कि यमराज की आराधना करने से न केवल मृत्यु का भय दूर होता है, बल्कि जीवन में संतुलन, अनुशासन और कर्म की चेतना भी बढ़ती है।
26 जनवरी को अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई उनकी कोशिश कुछ ही महीनों में सोशल मीडिया की चर्चा बनी। फिर आनंद महिंद्रा ने तारीफ की, मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई और अब The Ocean Cleanup के फाउंडर की ओर से काम करने का न्योता मिल गया।
मध्य प्रदेश:
कहते हैं कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि एक छोटी-सी कोशिश से होती है। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘Bittu Tabahi’ के नाम से जाना जाता है, ने इस बात को सच कर दिखाया है। जिस नदी में गंदगी और प्लास्टिक का अंबार देखकर लोग आगे बढ़ जाते थे, उसी नदी में यह युवक खुद उतर गया और सफाई का काम शुरू कर दिया। अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई यह मुहिम देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। उनकी मेहनत की चर्चा देशभर में हुई और उद्योगपति आनंद महिंद्रा से लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव तक ने उनके प्रयास की सराहना की। लेकिन कहानी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उनकी मुहिम की चर्चा विदेश तक पहुंची और The Ocean Cleanup के फाउंडर और CEO Boyan Slat ने उन्हें अपनी संस्था के साथ काम करने का न्योता दे दिया।
कौन हैं ‘Bittu Tabahi’? ‘Bittu Tabahi’ का असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है। वह मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र से हैं और पढ़ाई के साथ पर्यावरण को लेकर काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके सफाई अभियान के वीडियो सामने आने के बाद लोग उन्हें ‘Bittu Tabahi’ के नाम से पहचानने लगे। उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने नदी की खराब हालत देखकर केवल शिकायत नहीं की, बल्कि खुद सफाई के लिए नदी में उतरने का फैसला किया।
26 जनवरी से शुरू हुई सफाई की मुहिम रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेंद्र ने 26 जनवरी 2026 से अजनार नदी की सफाई का काम शुरू किया। नदी में प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, कचरा और काई जैसी गंदगी जमा थी। उन्होंने धीरे-धीरे इसे अपने हाथों से निकालना शुरू किया। शुरुआत में कुछ दोस्तों ने भी उनका साथ दिया, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी लगभग अकेले सुरेंद्र ने संभाल ली। उनका मकसद सिर्फ नदी के किनारे को साफ करना नहीं था, बल्कि लोगों को यह समझाना भी था कि जिस नदी से उन्हें पानी और जीवन मिलता है, उसमें कचरा डालना आखिरकार उसी समाज के लिए नुकसानदायक है।
अपनी जेब से खर्च किए हजारों रुपये इस मुहिम के दौरान सुरेंद्र ने सफाई से जुड़े सामान और डस्टबिन जैसी चीजों पर अपनी जेब से भी पैसा खर्च किया। रिपोर्ट्स में उनके करीब 30 हजार रुपये तक खर्च करने की बात सामने आई है। यानी न कोई बड़ा बजट, न कोई बड़ी टीम और न ही किसी बड़े अभियान का इंतजार। उन्होंने जितना संभव हुआ, उतना खुद किया और लगातार अपने काम के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे।
गंदे पानी और मुश्किलों के बीच भी नहीं छोड़ा काम नदी की सफाई करना कैमरे पर जितना आसान दिखाई देता है, असल में उतना ही मुश्किल है। गंदे पानी, कीचड़ और जमा कचरे के बीच घंटों काम करना पड़ता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेंद्र को इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और संक्रमण जैसी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्हें नदी में सांपों का भी सामना करना पड़ा।
पहले और बाद की तस्वीरों ने खींचा लोगों का ध्यान सुरेंद्र अपनी मुहिम के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहे। वीडियो में नदी की पहले की हालत और सफाई के बाद आया बदलाव दिखाई देता था। यही तस्वीरें और वीडियो लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करने लगे। धीरे-धीरे उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई और देशभर में लोग उनके बारे में बात करने लगे।
आनंद महिंद्रा ने भी की तारीफ जब सुरेंद्र की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से फैली तो यह उद्योगपति आनंद महिंद्रा तक भी पहुंची। उन्होंने उनके प्रयास की सराहना की और उनकी कहानी को प्रेरणादायक बताया। इसके बाद ‘Bittu Tabahi’ नाम सोशल मीडिया पर और ज्यादा चर्चा में आ गया। एक सामान्य युवा द्वारा अपने आसपास की समस्या के खिलाफ शुरू की गई मुहिम अब हजारों लोगों तक पहुंच चुकी थी।
CM मोहन यादव से हुई मुलाकात सुरेंद्र की मुहिम की चर्चा मध्य प्रदेश सरकार तक भी पहुंची। इसके बाद उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री मोहन यादव से हुई। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयास की तारीफ की और नदी व जल स्रोतों को बचाने के लिए ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। इस मुलाकात ने सुरेंद्र की मुहिम को एक और बड़ा मंच दिया। लेकिन शायद उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं था कि उनकी कहानी जल्द ही भारत की सीमाओं से बाहर जाने वाली है।
विदेश से आया जिंदगी बदलने वाला ऑफर सुरेंद्र की कहानी का सबसे बड़ा मोड़ अब सामने आया है। दुनिया भर में नदियों और समुद्रों से प्लास्टिक प्रदूषण हटाने के लिए काम करने वाली संस्था The Ocean Cleanup के फाउंडर और CEO Boyan Slat ने सुरेंद्र के वीडियो और उनके काम को देखा। उनकी मेहनत से प्रभावित होकर Boyan Slat ने सुरेंद्र को अपनी संस्था के साथ काम करने का न्योता दिया। यानी जिस युवक ने अपने शहर की एक नदी को साफ करने से शुरुआत की थी, अब उसके काम पर दुनिया के एक बड़े पर्यावरण संगठन की नजर पड़ी है।
हालांकि विदेशी ऑफर के बाद सुरेंद्र आगे क्या फैसला लेते हैं, यह अभी देखना बाकी है। लेकिन इतना जरूर है कि अजनार नदी के किनारे शुरू हुई एक युवक की छोटी-सी मुहिम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुकी है। और शायद यही इस कहानी की सबसे बड़ी सीख है—बदलाव के लिए हमेशा बड़ी टीम, बड़ा बजट या बड़ा पद जरूरी नहीं होता। कभी-कभी एक इंसान का पहला कदम ही पूरी कहानी बदल देता है।
वाराणसी में बीएचयू के मशहूर डॉक्टर टीके लहरी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है. उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान उनके साथ डॉक्टर अरविंद पांडेय ने मारपीट की. परिवार का आरोप है कि इसकी के एक हफ्ते बाद तक भी बीएचयू प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.
लाखों मरीजों के जीवन को दान देने वाले गरीबों के मसीहा पद्मश्री तपन कुमार लहरी से कथित मारपीट का आरोप परिजनों ने लगाया है. लेकिन इसकी शिकायत काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति कुल सचिव सहित दर्जनों अधिकारियों को मेल करके दी गई है. अर्जुन ने आरोप लगाया कि 29 अगस्त की घटना है. हफ्ता भर हो जाने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. लोगों को घटना की जानकारी होते ही आक्रोश फैल गया. लोग कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. वहीं, एसोसिएशन प्रोफेसर ने BHU के ऑफिशियल आईएमएस ग्रुप में शक्ति इस्तेमाल करने की बात की है, जबकि थप्पड़ मारने से इनकार किया है.
इलाज के दौरान हुआ विवाद- पिछले कई महीने से बीमार होने के कारण डॉ. लहरी को BHU के कार्डियोलॉजिक विभाग के आईसीयू में भर्ती कराया गया था. जहां पर एसोसिएट प्रोफेसर की डॉक्टर लहरी से किसी बात को लेकर विवाद हुआ. जिसके बाद उनके साथ कथित मारपीट का आरोप परिजनों ने लगाया है. परिजनों ने एक फोटो जारी किया है. जिसमें डॉ. लहरी के गालों पर उंगलियों के निशान, आंखों में ब्लड और आंखों के ऊपर काले निशान दिखाई दे रहे हैं.
आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई की हो रही मांग- डॉ. टीके लहरी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि अस्पताल परिसर में उनके ही विभाग के चिकित्सक डॉ. अरविंद पांडेय ने डॉ. लहरी के साथ मारपीट की. घटना को लेकर शिकायत किए जाने के बावजूद करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है. टीके लहरी के साथ मारपीट की घटना मीडिया में आने के बाद लोगों में आक्रोश है. इसको लेकर पुलिस में मुकदमा दर्ज करने कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.
BHU प्रशासन की भूमिका पर सवाल- इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. BHU के हृदय विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं सीनरी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर ओम शंकर ने आरोप लगाया जा रहा है कि BHU प्रशासन आरोपी चिकित्सक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि एसोसिएशन प्रोफेसर ने खुद आईएमएस के ग्रुप में बताया है कि वह लहरी के साथ सख्ती से पेश आए थे. लेकिन वह इस घटना से इनकार नहीं कर रहे हैं. इसका आशय है कि वह घटना के समय वहां पर थे, इसकी जांच किया जाना चाहिए कि कैसे इतनी गंभीर चोट टीके लहरी को आई है. अगर आईसीयू में सीसीटीवी लगा है तो सारी चीजें सामने आ सकती हैं, अब यह पता लगाना होगा कि सीसीटीवी वहां लगी है कि नहीं?
रिटायर होने के बाद भी फ्री में करते हैं इलाज- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित चिकित्सा संस्थान में पद्मश्री कार्डियोथोरेसिक सर्जन के रूप में कार्यरत 2003 रिटायर्ड है. उसके बाद भी वो लगातार BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल में अपनी सेवाएं निशुल्क दे रहे हैं. यही नहीं, डॉक्टर लहरी अपनी पेंशन को भी काशी हिंदू विश्वविद्यालय को दान कर देते हैं. सिर्फ वह अपने खर्चे का पैसा अपने पास रखते हैं.
उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने एक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने कपल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. ये कपल पहले कैफे चलाते थे, लेकिन कारोबार में नुकसान हुआ तो क्राइम का रास्ता अपना लिया. ये गिरोह पहले चोरी करते थे, उसके बाद बार-रेस्तरां में पार्टी करते थे.
उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. एक प्रेमी जोड़ा पहले कैफे चलाता था. लेकिन जब कारोबार में नुकसान हुआ तो इस कपल ने अपराध का रास्ता चुन लिया. ये कपल चोरी की वारदातों को अंजाम देने लगा. अब प्रेमी जोड़े समेत 3 लोग पुलिस की गिरफ्त में हैं.
प्रेमी युगल समेत 3 गिरफ्तार- कैफे के कारोबार में नुकसान होने के बाद चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक प्रेमी जोड़े समेत तीन आरोपियों को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया है. थाना सेक्टर-113 पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की ज्वेलरी, 3.5 लाख रुपये नकद, पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली एक अर्टिगा कार बरामद की है. कार पर कथित तौर पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी.
एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि आरोपियों की पहचान कैलाश उर्फ दिवाकर, इरफान उर्फ इमरान और सोनाली के रूप में हुई है. पुलिस ने तीनों आरोपियों को सेक्टर-123 स्थित श्मशान घाट के पास से गिरफ्तार किया.
बंद पड़े घरों को बनाते थे निशाना- पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अर्टिगा कार में सवार होकर शहर के हाईराइज सोसाइटी और अन्य इलाकों में मकानों की रेकी करते थे. इसके बाद बंद पड़े घरों को निशाना बनाकर ज्वेलरी, नकदी, लैपटॉप और अन्य कीमती सामान चोरी कर लेते थे. फिर चोरी किए गए सामान और नकदी को तीनों आरोपी आपस में बांट लेते थे.
लिव-इन रिलेशन में रहते थे दो चोर- पुलिस जांच में सामने आया कि दिवाकर और सोनाली प्रेमी-प्रेमिका हैं और लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं. पुलिस के अनुसार, सोनाली गैंग को लीड करने और रेकी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी, जबकि दिवाकर और उनका साथी इरफान चोरी की वारदातों को अंजाम देने में शामिल थे.
कैफे कारोबार में नुकसान ने बनाया चोर- पुलिस के अनुसार, प्रेमी जोड़े ने पहले गाजियाबाद और बाद में नोएडा में कैफे का कारोबार किया था. कैफे के बिजनेस में नुकसान होने के बाद दोनों आर्थिक संकट में आ गए और इसके बाद चोरी की घटनाओं को अंजाम देने लगे. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी दिन के समय चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे और रात में रेस्तरां और बार में पार्टी करते थे.
लैपटॉप, टैबलेट, फोन, कैश बरामद- पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की ज्वेलरी के अलावा पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और 3.5 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. इसके अलावा चोरी की घटनाओं में इस्तेमाल की जाने वाली अर्टिगा कार को भी कब्जे में लिया गया है. फिलहाल अब थाना सेक्टर-113 पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास और उनसे जुड़े अन्य चोरी के मामलों की जांच कर रही है.